Cooking Oil Price Update:देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को कुछ राहत मिली है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल और रिफाइंड तेल के दाम हाल ही में कम हुए हैं। खाद्य तेल हर परिवार की जरूरत है, इसलिए इसकी कीमतों में गिरावट का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। जब रसोई खर्च कम होता है तो परिवार अन्य जरूरी जरूरतों पर ध्यान दे पाते हैं। यही वजह है कि तेल की कीमतों में आई यह नरमी लोगों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
करों में कमी से मिला फायदा
खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण कर ढांचे में किया गया बदलाव है। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं पर कुछ करों में राहत दी है, जिससे आयात और वितरण लागत कम हुई है। जब कंपनियों पर लागत का दबाव घटता है तो वे बाजार में उत्पाद सस्ती दरों पर उपलब्ध करा पाती हैं। इसके अलावा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार से भी बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे कीमतों पर नियंत्रण बना है।
सरसों तेल के दाम में नरमी
सरसों तेल खासकर उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है। इसकी तेज खुशबू और पारंपरिक स्वाद के कारण यह कई व्यंजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीते महीनों में इसके दाम काफी बढ़ गए थे, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब थोक बाजार में इसकी कीमत लगभग 15,600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बताई जा रही है। इस कमी का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। नियमित रूप से सरसों तेल खरीदने वाले परिवारों के लिए यह राहत की बात है।
रिफाइंड तेल की कीमतों में गिरावट
रिफाइंड तेल का उपयोग शहरों में अधिक होता है। इसकी हल्की बनावट और बिना गंध की विशेषता के कारण यह घरों, होटलों और छोटे व्यवसायों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। पहले इसकी कीमत 160 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। अब यह घटकर लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई है। यह बदलाव मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
घरेलू बजट पर सकारात्मक असर
तेल की कीमतों में कमी से हर महीने कुछ न कुछ बचत संभव है। यदि परिवार हर महीने थोड़ी भी बचत कर पाते हैं तो साल भर में यह राशि काफी हो जाती है। इस बचत को शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य जरूरी खर्चों में लगाया जा सकता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए यह राहत महत्वपूर्ण है।
भविष्य में कीमतों की स्थिति
बाजार की स्थिति मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। त्योहारों और शादी के मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों में फिर बदलाव हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तिलहन की कीमतों का प्रभाव भी घरेलू बाजार पर पड़ता है। इसलिए उपभोक्ताओं को समय-समय पर ताजा दरों की जानकारी लेते रहना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य बाजार जानकारी पर आधारित है। तेल की वास्तविक कीमतें स्थान और बाजार के अनुसार अलग हो सकती हैं। खरीदारी से पहले अपने स्थानीय विक्रेता या अधिकृत स्रोत से ताजा दर की पुष्टि अवश्य करें।








