New Income Tax Bill 2026:भारत सरकार ने वर्ष 2025 के लिए नया इनकम टैक्स बिल पेश किया है। इसे देश की कर प्रणाली में बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से आयकर कानून 1961 में कई संशोधन होते रहे, जिससे कानून जटिल और समझने में कठिन हो गया था। आम करदाता के लिए नियमों को समझना मुश्किल हो गया था। इसी स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने नया और सरल इनकम टैक्स कानून लागू करने का फैसला किया है।
नया कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी
पुराना आयकर कानून लगभग छह दशक पुराना था। समय के साथ इसमें कई धाराएँ जोड़ी गईं, कुछ बदली गईं और कुछ हटाई गईं, लेकिन इसकी भाषा और ढांचा आम लोगों के लिए आसान नहीं था। सरकार का मानना है कि कर कानून ऐसा होना चाहिए जिसे सामान्य नागरिक भी आसानी से समझ सके। नया बिल इसी सोच के साथ तैयार किया गया है ताकि नियम सरल हों और भ्रम की स्थिति खत्म हो।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुसार बदलाव
आज भारत तेजी से डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ रहा है। क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स और ऑनलाइन कमाई जैसे नए क्षेत्रों में पहले स्पष्ट नियम नहीं थे। नए इनकम टैक्स बिल में इन सभी डिजिटल संपत्तियों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इससे करदाताओं को यह समझने में आसानी होगी कि किस प्रकार की डिजिटल आय पर कितना टैक्स देना है। इससे भविष्य में विवाद कम होने की संभावना है।
टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव
नए बिल का सबसे बड़ा असर टैक्स स्लैब में बदलाव के रूप में सामने आया है। पहले 2.5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स नहीं लगता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। इससे कम आय वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
नए स्लैब के अनुसार 4 लाख तक कोई टैक्स नहीं होगा। 4 से 8 लाख तक 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख तक 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख तक 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख तक 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख तक 25 प्रतिशत और 24 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। पहले 15 लाख से ऊपर की आय पर सीधे 30 प्रतिशत टैक्स लगता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 24 लाख कर दी गई है, जिससे मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग को भी फायदा मिलेगा। अनुमान है कि एक वेतनभोगी व्यक्ति को सालाना अच्छी-खासी बचत हो सकती है।
छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए राहत
नए कानून में छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए भी राहत दी गई है। अनुमानित कराधान प्रणाली को आसान बनाया गया है, जिससे उन्हें विस्तृत हिसाब-किताब रखने की जरूरत कम होगी। इससे छोटे कारोबारियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग स्वेच्छा से टैक्स प्रणाली से जुड़ें।
फेसलेस और डिजिटल टैक्स प्रशासन
नया बिल टैक्स प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल और फेसलेस बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है। फेसलेस असेसमेंट से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना घटेगी। कर विवादों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। इससे करदाताओं का भरोसा मजबूत होगा।
पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों की सफाई
सरकार ने कई पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाया है। कई धाराओं को सरल भाषा में दोबारा लिखा गया है ताकि लोग बिना विशेषज्ञ की मदद के भी नियमों को समझ सकें। वरिष्ठ नागरिकों और अन्य विशेष वर्गों को मिलने वाली छूट को जारी रखा गया है।
नया इनकम टैक्स बिल 2025 कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। टैक्स स्लैब में बदलाव से अधिकांश करदाताओं को राहत मिलने की संभावना है। डिजिटल संपत्तियों पर स्पष्ट नियम और फेसलेस व्यवस्था से सिस्टम अधिक भरोसेमंद बनेगा। यदि यह कानून सही तरीके से लागू होता है तो इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और करदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। टैक्स से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले आधिकारिक अधिसूचना या किसी योग्य कर सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।








